Free home delivery above INR 600/-
Blog archive

मोदी सरकार द्वारा सराहनीय कदम- देश को सबसे लम्बा भूपेन हज़ारिका पुल का तोहफा

 Image result for images of dhola sadiya bridge

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के तीन वर्ष पूरा होते होते पीएम मोदी ने भारत को सबसे लम्बे पुल का तोहफा दिया। असम स्थित 9.15 किलोमीटर लम्बा, यह एशिया का सबसे लम्बा पुल है। पीएम मोदी ने 26 May 2017 को ढोला  सादिया के बीच बने पुल का उद्घाटन किया जो असम  के सुदूर पूर्वी कोने को अरुणाचल प्रदेश से जोड़ता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने असम में सम्बोधित करते हुए कहा की इस पुल का यहाँ के लोग पांच दशक से प्रतीक्षा कर रहे थे जो अब जाकर उन्हें मिला है। उन्होंने यह भी कहा की यदि बाजपेयी सरकार दुबारा जीत कर आयी होती तो यह पुल दस साल पहले ही बन जाता।

 भूपेन हज़ारिका पुल की विशषताये  -

1) भारत ही नहीं एशिया का सबसे लम्बा पुल - 2056 crore की लागत  से बना यह एशिया का सबसे लम्बा पुल है जो की 182 खम्भों पर खड़ा है।

2) समय की बचत - अरुणांचल जाने में पहले जहा सड़क से आठ घंटे और नाव से चार घंटे लगते थे वो अब नहीं लगेंगे। सरकार  का ये भी कहना है की दूरी कम होने की वजह से प्रतिदिन अब दस लाख तक के पेट्रोल और डीजल की बचत अत्याधुनिक उपकरणों होगी।

3) अच्छी भार क्षमता - भूपेण हज़ारिका पुल को इस तरह से बनाया गया है की 60 टन तक के लड़ाकू टैंक आराम से गुजर सके, जिसे हमारी सेना चीन से लगी सीमा पर आराम से पहुँच सके तैनाती के लिए।

4) विकास में मदद - भूपेन हज़ारिका पुल के बनने से स्थानीय लोगों और सेना को तो सहूलियत मिलेगी ही, साथ में अच्छी आवाजाही से पर्यटन में भी सुधर होगा। पनबिजली परियोजनाओं में भी निवेश आने की सम्भावनाये बढ़ जाएगी जिससे देश में बिजली की उत्पादकता बढ़ेगी।

5) भूकंप रोधी-तकनीक से लैस- चूँकि उत्तर पूर्व उच्च भूकम्पीय क्षेत्र है इसलिए भूपेन हज़ारिका पुल को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस किया गया है। इसके सभी 182 खम्भों में भूकम्पीय बफर्स है जो भूकंप के खतरों से इस पुल को सुरक्षित रखेंगे।

6) चीन पर नकेल - सामरिक लिहाज से भूपेन हज़ारिका पुल का चीन के खिलाफ भारत की तैयारी की दिशा में अहम रोल है। चीन बॉर्डर से इस पुल की हवाई दूरी १०० किलोमीटर से भी कम है।

अन्ततः केंद्र सरकार की यह एक महत्वपूर्ण  उपलब्धि मानी जा रही है।

Leave your comment